छत्तीसगढ़ का गर्व: लोकेश पटाडे की जिरेनियम खेती की प्रेरणादायक कहानी

छत्तीसगढ़ का गर्व: लोकेश पटाडे की जिरेनियम खेती की प्रेरणादायक कहानी

एक इंजीनियर से सस्टेनेबल किसान तक का सफर:

लोकेश पटाडे, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के जयरामनगर गांव से ताल्लुक रखते हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी को एक नई दिशा दी। एक सफल इलेक्ट्रिकल कंसल्टेंट के रूप में काम करने के बाद, उन्होंने पारंपरिक नौकरी को अलविदा कहकर जिरेनियम की खेती शुरू की। यह निर्णय न केवल उनके लिए एक क्रांतिकारी कदम था, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए भी एक प्रेरणा बन गया। आज, 2 जुलाई 2025 को, उनकी कहानी सुर्खियों में है, जो साबित करती है कि मेहनत, जुनून और नवाचार से कोई भी सपना पूरा हो सकता है।

शुरुआती चुनौतियाँ और हौसले का जोश:

लोकेश का सफर आसान नहीं था। एक इंजीनियरिंग की डिग्री और शहरी जीवन की सुविधाओं को छोड़कर वे अपने गांव लौटे। दो साल तक शोध करने के बाद, उन्होंने 80,000 रुपये प्रति एकड़ की लागत से तीन एकड़ जमीन पर जिरेनियम की खेती शुरू की। शुरुआत में नुकसान हुआ—फसलें नष्ट हुईं, और बाजार में मांग कम थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जिरेनियम, जिसे पेलार्गोनियम ग्रेवियोलेन्स (केलकर किस्म) कहते हैं, कीट प्रतिरोधी और कम पानी की जरूरत वाला पौधा है, जिसने उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई। उनकी मेहनत और धैर्य ने उन्हें आगे बढ़ाया।

जिरेनियम खेती से सफलता की उड़ान:

आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ:

लोकेश के खेतों से साल में 50-60 लीटर तेल प्रति एकड़ निकलता है, जिसकी कीमत 11,000 रुपये प्रति लीटर है। यह तेल कॉस्मेटिक, परफ्यूम, और आयुर्वेदिक उत्पादों में इस्तेमाल होता है। हर तीन-चार महीने में फसल काटी जाती है, और एक पौधा तीन-चार साल तक उत्पादन देता है। उनकी कंपनी, मीडो एग्रोटेक, ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के साथ मिलकर काम किया और राज्य सरकार से प्रशंसा पाई। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी उदाहरण है।

ग्रामीणों के लिए प्रेरणा:

लोकेश ने स्थानीय किसानों को प्रशिक्षित किया और उन्हें जिरेनियम खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके प्रयासों से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। वे कहते हैं, “अगर हम मेहनत करें और प्रकृति के साथ चलें, तो सफलता निश्चित है।” उनकी यह सोच ग्रामीण युवाओं को सशक्त बना रही है।

मेहनत और नवाचार का मंत्र:

बेकार से उपयोगी तक का सफर:

लोकेश ने जिरेनियम से प्राकृतिक हवा ताजा करने वाले उत्पाद बनाए, जो बेकार चीजों को उपयोगी बनाने की उनकी सोच को दर्शाता है। उन्होंने साबित किया कि पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई संभावनाएं खोजी जा सकती हैं। उनकी मेहनत का फल तब और मीठा हुआ जब उनकी कंपनी को राज्य सरकार ने सम्मानित किया।

युवाओं के लिए संदेश:

लोकेश की कहानी हर उस युवा के लिए एक सबक है जो अपने सपनों को लेकर संशय में है। वे कहते हैं, “डर छोड़ो, अपने जुनून को पहचानो, और मेहनत करो। सफलता अपने आप आपके कदम चूमेगी।” यह संदेश आज के समय में, जब बेरोजगारी और असुरक्षा बढ़ रही है, युवाओं को नई दिशा देता है।

भविष्य की योजनाएं और प्रेरणा:

सस्टेनेबल खेती का विस्तार:

लोकेश का लक्ष्य अब जिरेनियम खेती को पूरे छत्तीसगढ़ में फैलाना है। वे और किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। उनकी योजना सौर ऊर्जा से संचालित डिस्टिलेशन यूनिट्स स्थापित करने की भी है, जो पर्यावरण के लिए और लाभकारी होगी।

हर भारतीय के लिए प्रेरणा:

लोकेश की कहानी साबित करती है कि अगर जुनून हो और मेहनत की राह पर चलने का हौसला हो, तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं। आज वे छत्तीसगढ़ का गर्व हैं, और कल वे पूरे भारत को प्रेरित करेंगे। तो चलो, उनकी इस प्रेरणा को अपने जीवन में उतारें और अपने सपनों को हकीकत बनाएं!

निष्कर्ष:

लोकेश पटाडे की कहानी एक ऐसा प्रकाशस्तंभ है जो हर युवा को अपने जुनून को पहचानने और उसे हकीकत में बदलने की प्रेरणा देती है। क्या आप भी अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित हुए? अपनी राय कमेंट में साझा करें!

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