डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर (बाबा साहेब) के परिवार की कहानी – बेटों से तीसरी पीढ़ी तक
भूमिका
डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर, जिन्हें बाबा साहेब के नाम से जाना जाता है, भारतीय संविधान के निर्माता और समाज सुधारक थे। हर वर्ष 14 अप्रैल को मनाई जाने वाली अंबेडकर जयंती उनके विचारों और उपलब्धियों के प्रति सम्मान दर्शाती है। इस दिन जुड़े सवाल होते हैं—उन्हें परिवार में कौन-कौन था, उनके बेटे क्या बने, और आज उनकी तीसरी पीढ़ी कहाँ
कर जाती है। इस लेख में हम उनके परिवार की रूपरेखा, बेटों की जीवनगाथा, और वर्तमान पीढ़ी की भूमिका का विशेष विश्लेषण देंगे।
परिचय – Ambedkar परिवार की शुरुआत
- Dr. B. R. Ambedkar (बाबा साहेब) का जन्म था परवरिश महाराष्ट्र के अम्बादवे गाँव में, जहाँ उनके पिता रामजी सखपाल ब्रिटिश फौज में सूबेदार थे। माता भीमाबाई की मृत्यु पर उनकी कठोर बचपन की यादें उन्हें अकिंचन जीवन के संघर्ष से जोड़ती हैं ।
- 14 बच्चों में से अनगिनत मौतों के बाद केवल यशवंत बच पाए, जिनका जीवन और आगे Ambedkar परिवार का नाम आगे बढ़ाया ।
- बाबासाहेब की पहली पत्नी रमाबाई (1898–1935) थीं; उन्होंने उनका अध्ययन-कार्य का मार्गदर्शन किया। 1948 में, Bramabeb ने दूसरी शादी डॉक्टर साविता से की, जिन्होंने उन्हें जीवन और स्वास्थ्य में बहुत सहयोग दिया ।
Ambedkar की पत्नियाँ और पुत्र – Ramabai, Savita और यशवंत
पहली पत्नी – रामाबाई आंबेडकर
- डॉ. आंबेडकर की पहली पत्नी रामाबाई भिमराव आंबेडकर (Ramabai), जिन्हें ‘रमाई’ या ‘रमु’ नाम से पुकारा जाता था, का जन्म 7 फरवरी 1894 को महाराष्ट्र के दापोली तालुके में एक गरीब दलित परिवार में हुआ था । उन्होंने 4 अप्रैल 1906 को मात्र 9–12 वर्ष की आयु में युवा आंबेडकर (15 वर्षीय) से सांप्रदायिक प्रतिबद्धता में विवाह किया था। उस समय सामाजिक मान्यताओं और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद रामाबाई ने गृहस्थ जीवन को संभाला, बच्चों की परवरिश की और साहब की शिक्षा के दौरान अत्यंत संघर्ष किया।
- उन्होंने पाँच संतानें दीं — यशवंत, गंगाधर, रमेश, राजरत्न और इंदु — जिनमें केवल यशवंत ही बच पाए, अन्य चार का बचपन में निधन हो गया था । रामाबाई ने साहब को समर्पित सहायता दी, अपनी कर्ज़-शक्ति से घर चलाया, ईद-उल-फ़ितर के माहौल में विश्वास बनाए रखा और अक्षमता में भी साहस दिखाया । अंततः 27 मई 1935 को राजगृह, बंबई में उनका निधन हो गया — 29 वर्षों के वैवाहिक जीवन के बाद ।
दूसरी पत्नी – डॉ. सविता आंबेडकर
- रामाबाई के निधन के बाद लगभग 13 वर्षों के अंतराल के बाद, डॉ. आंबेडकर ने डॉ. शारदा कबीर से विवाह किया, जिन्हें उन्होंने नाम परिवर्तन कर सविता आंबेडकर कहा । विवाह 15 अप्रैल 1948 को दिल्ली में हुआ, उस समय आंबेडकर 57 वर्ष और सविता 39 वर्ष की थीं ।
- सविता, एक मेडिकल डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। आंबेडकर की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के दौरान उन्होंने उनकी देखभाल की, उनके जीवन में 8–10 वर्ष बढ़ाए, और बुद्ध धर्म के अनुयायी भी बनीं । उन्होंने अपने पति के निधन के बाद उनके आंदोलन और विरासत को आगे बढ़ाया; पुणे में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संग्रहालय स्थापित कराने में भी मदद की ।
- उनका निधन 29 मई 2003 को मुंबई में हुआ, उम्र 93 वर्ष ।
बेटा – Yashwant Bhimrao Ambedkar
- 1912 में जन्मा यशवंत ही एकमात्र बचा बच्चा था जिसने वयस्कता तक जीवन जिया; बाक़ी सभी शिशु अवस्था में ही निधन हो गए।
- वे “Bhaiyasaheb” कहलाए; Buddhist Society of India के दूसरे अध्यक्ष बने (1957–1977), सोशल एक्टिविस्ट, समाचार “जनता” और “प्रबुद्ध भारत” के संपादक रहे ।
दूसरी पीढ़ी: यशवंत के पुत्र-पोते – Prakash, Anandraj व Bhimrao
Prakash Yashwant Ambedkar
- प्रकाश Ambedkar (जन्म 1954) सबसे वरिष्ठ Ambedkar पूर्वज हैं; वकील, समाजसुधारक व राजनेता।
- Vanchit Bahujan Aghadi (VBA) के संस्थापक; तीन बार सांसद (Lok Sabha और Rajya Sabha) रहे ।
- उन्होंने “Akola Pattern” के राजनीतिक सिद्धांत विकसित किए; 2017 में Prabuddh Bharat समाचार पुनर्जीवित किया ।
Anandraj Yashwant Ambedkar
- यशवंत के दूसरे पुत्र; Republican Sena के नेता हैं। राजनीति में सक्रिय, परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हैं ।
Bhimrao Yashwant Ambedkar
- सबसे कम सार्वजनिक प्रोफ़ाइल वाले पूर्वज। Buddhist और समाजसुधारक गतिविधियों में सक्रिय हैं, लेकिन राजनीति में व्यापक भूमिका नहीं ।
तीसरी और चौथी पीढ़ी: प्रकाश, आनंदराज एवं अन्य
Prakash की संतान – Sujat Ambedkar
- प्रकाश Ambedkar का पुत्र Sujat Ambedkar पत्रकारिता में रुचि रखते हैं, VBA में सक्रिय हैं। चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं ।
Anandraj की संतान – Sahil & Aman
- साहिल और अमन Anandraj के पुत्र हैं; दोनों युवा नेता के रूप में सक्रिय हैं। हृदित Daughter Hritika Ambedkar भी उत्प्रेरक रूप में उभर रही हैं ।
Rajratna Ambedkar
- यह Ambedkar परिवार से जन्मा नहीं, बल्कि Dr. Ambedkar के भाई Anandrao की संतान है; named after Babasaheb’s son Rajratna (who died infancy) ।
- रोचक तथ्य: Rajratna Ambedkar ने 2022 में दिल्ली में 10,000+ को बौद्ध धर्मांतरण करवाया; वर्तमान में Buddhist Society of India के अध्यक्ष; World Fellowship of Buddhists के कार्यकर्ता हैं। परिवार की चौथी पीढ़ी में उनकी पहचान प्रमुख है ।
परिवार की वर्तमान स्थिति – राजनीति, धर्म और सामाजिक कार्य
राजनीतिक सक्रियता और विरासत
- Prakash Ambedkar आधुनिक भारत में Ambedkarite राजनीति का प्रमुख चेहरा हैं। उन्होंने VBA (Vanchit Bahujan Aaghadi) बनाई और विभिन्न समुदायों के बीच राजनीतिक गठबंधन स्थापित किया। लोकसभा एवं राज्यसभा में सांसद रहे ।
- Anandraj Ambedkar Republican Sena के प्रमुख हैं और दलित बौद्ध आंदोलन के अंतर्गत संगठनात्मक योगदान देते हैं। वे Indu Mill भूमि के संरक्षण की लड़ाई में भी जुड़े रहे — जो उनके सामाजिक न्याय आंदोलन की पहचान है ।
- Bhimrao Ambedkar (पुत्र) Buddhist Society of India में सक्रिय थे। वर्तमान में संगठन के अध्यक्ष के रूप में परिवार का नेतृत्व वह संभालते आए हैं, साथ ही Samata Sainik Dal जैसे संगठनों में भूमिका निभाई है ।
धार्मिक और सामाजिक सरोकार
- समूची पीढ़ी बुद्ध धर्म की आस्थाओं से गहरे जुड़े हुए हैं। Yashwant Ambedkar से लेकर वर्तमान अध्यक्ष Rajratna Ambedkar तक बौद्ध समाज में सक्रिय भूमिका रखते आए हैं ।
- शैक्षिक संस्थानों, महासभावों और आंदोलन वर्गों में ये परिवार Ambedkarite मूल्यों का प्रचार व प्रवर्तन करता है।
तीसरी और चौथी पीढ़ी का योगदान
- Prakash Ambedkar की संतानें (सुझात, रामाबाई आदि) सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में सीमित लेकिन निश्चित भूमिका निभा रही हैं। Sujat Ambedkar पत्रकारिता और सोशल मीडिया प्रभाव में सक्रिय हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में अपेक्षाकृत नई भूमिका पर हैं ।
- आनंद तेलतुम्बडे (रामाबाई की बेटी के पति) लेखन और सामाजिक आलोचना में प्रमुख योगदान देते रहे। परिवार की चौथी पीढ़ी अभी उभरने के केंद्र में है ।
प्रमुख सवाल–जवाब – FAQs:
प्रश्न 1 बाबा साहेब की कितनी संताने थीं और कौन बचा?
उत्तर: कुल पाँच संतानें—रामाबाई से—जन्मीं। उनमें केवल यशवंत जीवित रहे; बाकी बचपन में निधन हो गया ।
प्रश्न 2 प्रकाश Ambedkar कौन हैं और वर्तमान में उनका क्या कार्य है?
उत्तर: प्रकाश Ambedkar बाबा साहेब के पोते हैं, VBA पार्टी के नेता, पूर्व सांसद और सामाजिक न्याय आंदोलन में सक्रिय हैं ।
प्रश्न 3 बाबा साहेब की दूसरी पत्नी साविता Ambedkar से कोई संतान नहीं हुई?
उत्तर: हां, साविता Ambedkar की कोई संतान नहीं थी; वे केवल यशवंत Ambedkar का जीवन संगिनी बनीं और उनकी देखरेख की ।
प्रश्न 4 तीसरी और चौथी पीढ़ी अब कहीं सक्रिय हैं?
उत्तर: हां—Sujat (Prakash का बेटा), Sahil & Aman (Anandraj के पुत्र) और Rajratna Ambedkar (Anandrao की पीढ़ी) सक्रिय हैं। Rajratna को बौद्ध समाज और समारोहों में प्रमुख माना जाता है ।
प्रश्न 5 परिवार की विरासत राजगृह (Rajgruha) कहाँ है और वर्तमान क्या स्थिति है?
उत्तर: राजगृह मुंबई के दादर में स्थित है, जिसमें Dr. Ambedkar की विशाल पुस्तकालय रही। अब यह अंबेडकर नेशनल मेमोरियल बन चुका है और हर Ambedkar Jayanti पर श्रद्धांजलि स्थल होता है ।
निष्कर्ष: अंबेडकर परिवार की कहानी – बेटों से तीसरी पीढ़ी तक
डॉ. भीमराव आंबेडकर केवल भारत के संविधान निर्माता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने समाज में समानता, शिक्षा और आत्म-सम्मान की अलख जगाई थी। उनकी सोच और संघर्ष केवल उनके जीवन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनके परिवार के माध्यम से अगली पीढ़ियों तक भी पहुँचे।
यशवंत भिमराव आंबेडकर, उनके इकलौते पुत्र, भले ही उतनी राजनीतिक या वैचारिक ऊँचाई तक नहीं पहुँचे जितनी उनके पिता पहुँचे थे, लेकिन उन्होंने बाबासाहेब की विरासत को संरक्षित और सम्मानित रखने की कोशिश की। यशवंत जी का मुख्य योगदान बाबासाहेब के कार्यों का दस्तावेज़ीकरण और उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाने में रहा।
तीसरी पीढ़ी में प्रकाश आंबेडकर ने सक्रिय राजनीति को अपनाया। वे बाबासाहेब की विचारधारा को लेकर संसद तक पहुँचे और ‘वंचित बहुजन आघाड़ी’ जैसी सामाजिक-राजनीतिक पहल की। वहीं आनंद राज आंबेडकर ने भी बौद्ध धम्म प्रचार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में काम किया।
आज की पीढ़ी यानी चौथी पीढ़ी तक आते-आते परिवार के कुछ सदस्य राजनीति, कुछ सामाजिक आंदोलन, तो कुछ धर्म और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। हालांकि, यह भी सच है कि कई बार आंबेडकर परिवार के सदस्य आपस में वैचारिक या रणनीतिक मतभेद के कारण अलग-अलग रास्तों पर चलते नज़र आए हैं।
फिर भी, अंबेडकर परिवार की एक प्रमुख उपलब्धि यह है कि उन्होंने बाबासाहेब की मूल सोच – “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” – को जीवित रखा है। सामाजिक न्याय, धर्मांतरण आंदोलन (बौद्ध धम्म), समानता की लड़ाई और वंचितों की आवाज़ उठाने के प्रयासों में परिवार आज भी किसी न किसी रूप में मौजूद है।
इसलिए यह कहना अनुचित नहीं होगा कि अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, और उनका परिवार उस विचारधारा को आगे ले जाने वाली एक जीवंत कड़ी है। अंबेडकर जयंती इस कड़ी को नमन करने और नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का दिन है – कि वे भी समाज में बदलाव लाने के लिए खड़े हों, सोचें, समझें और आगे बढ़ें।
