भारत का सबसे दक्षिणतम बिंदु कौन सा है? – कन्याकुमारी या इंदिरा पॉइंट?

भारत का सबसे दक्षिणतम बिंदु कौन सा है? – कन्याकुमारी या इंदिरा पॉइंट?

प्रस्तावना:

भारत के दक्षिण की सीमा को समझना केवल भूगोल का विषय नहीं, बल्कि यह धार्मिक, रणनीतिक, पर्यावरणीय, और राष्ट्रीय पहचान का मुद्दा भी है। कन्याकुमारी और इंदिरा पॉइंट—दोनों स्थान अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। इस लेख में हम इन सभी बिंदुओं को तीन मुख्य दृष्टिकोण—मुख्य भूमि, सीमा, और सामरिक महत्व—से विभाजित कर समझेंगे।

कन्याकुमारी (मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिंदु)-

भौगोलिक स्थिति (Geographical Coordinates):

  • तमिलनाडु के दक्षिणी सिरे पर स्थित, अक्षांश 8°04′08″ N, देश की मुख्य भूमि का अंतिम बिंदु है
  • यह हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के संगम पर है, जिसे ‘त्रिवेणी सागर’ कहा जाता है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व:

  • भगवती कन्याकुमारी देवी को समर्पित प्राचीन मंदिर, स्वामी विवेकानंद रॉक मेमोरियल, थिरुवल्लुवर प्रतिमा (133 ft) मुख्य आकर्षण हैं
  • सूर्यास्त‑सूर्योदय देखने हजारों लोग आते हैं, जिसे आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुंदरता का सम्मिलन माना जाता है।

पहुँच और पर्यटन

  • निकटतम शहर: नागरकोइल (~20 किमी), रास्ते से जुड़ा हुआ। वायुमार्ग से त्रिवेंद्रम (Thiruvananthapuram) आने के बाद सड़क मार्ग से पहुँचा जाता है
  • आकर्षण स्थल: Vivekananda Rock Memorial, Thiruvalluvar Statue, Padmanabhapuram राजमहल, चितारल जैन मंदिर, तिरुपरप्पु फॉल्स आदि।

इंदिरा पॉइंट (भारत का संपूर्ण क्षेत्रीय दक्षिणतम बिंदु)-

इंदिरा पॉइंट का संक्षिप्त परिचय:

इंदिरा पॉइंट भारत का सबसे दक्षिणी भू-बिंदु है, जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है। यह बिंदु ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी किनारे पर स्थित है और यह भौगोलिक रूप से भारत का अंतिम बिंदु माना जाता है। इंदिरा पॉइंट पहले “पिग्मेलन पॉइंट” के नाम से जाना जाता था, जिसे 1985 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सम्मान में “इंदिरा पॉइंट” नाम दिया गया।

भूगोलिक स्थिति (Geographical Coordinates) और विशेषताएं:

इंदिरा पॉइंट की सटीक स्थिति-

  • अक्षांश: 6° 45’ उत्तरी
  • देशांतर: 93° 49’ पूर्वी
  • यह बिंदु बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के मिलन बिंदु पर स्थित है।
  • यह भारत की मुख्यभूमि से काफी दूर, लगभग 550 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है।

पर्यावरण और जैव विविधता:

  • इंदिरा पॉइंट के आसपास घना ट्रॉपिकल वर्षावन, कोरल रीफ और समृद्ध समुद्री जीवन पाया जाता है।
  • यह क्षेत्र UNESCO Biosphere Reserve – ग्रेट निकोबार रिज़र्व के अंतर्गत आता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और नामकरण – इंदिरा पॉइंट का इतिहास–

औपनिवेशिक युग में पहचान – ‘पिग्मेलन पॉइंट’ का उद्गम

  • ब्रिटिश शासन काल में जब अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को राजनीतिक बंदियों के कारावास के रूप में विकसित किया जा रहा था, तब उन्होंने इस द्वीपसमूह के दक्षिणी छोर की भौगोलिक सीमा को चिह्नित करने के लिए इस स्थान की पहचान की।
  • उस समय इस बिंदु को “Pygmalion Point” या “पिग्मेलन पॉइंट” कहा जाता था, जिसका नाम ग्रीक मिथकीय पात्र Pygmalion के नाम पर रखा गया था।
  • यह नामकरण यूरोपीय समुद्री नक्शों और नौवहन गाइड में उपयोग में लाया गया था।

रणनीतिक और नौवहन महत्त्व

  • द्वीपसमूह की यह लोकेशन बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के संगम पर है, जो नौसैनिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।
  • अंग्रेजों ने यहाँ एक प्रकाशस्तंभ (Light House) की स्थापना की थी, जिससे इस क्षेत्र में आने वाले जलपोतों को दिशा मिल सके।
  • स्वतंत्रता के बाद भी भारत सरकार ने इस बिंदु की सैन्य और समुद्री निगरानी को बरकरार रखा।

 नामकरण – इंदिरा गांधी के सम्मान में ‘इंदिरा पॉइंट’

  • भारत की तीसरी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की 1984 में हुई हत्या के बाद उनके सम्मान में देशभर में कई स्मारकों, संस्थानों और स्थलों का नामकरण किया गया।
  • 30 अक्टूबर 1985 को, भारत सरकार ने इस स्थान का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर “इंदिरा पॉइंट” रख दिया।
  • इसका उद्देश्य था:
    • इंदिरा गांधी के नेतृत्व और योगदान को अमर करना।
    • भारत के दूरस्थ हिस्सों को राष्ट्रीय एकता के प्रतीकों से जोड़ना।
  • यह नामकरण न केवल भावनात्मक महत्व रखता है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारत की भौगोलिक सीमाएं केवल मानचित्र पर नहीं, बल्कि देशभक्ति और राष्ट्रगौरव की भावना से जुड़ी हैं।

इंदिरा पॉइंट – राष्ट्रीय सुरक्षा और पहचान का प्रतीक

  • इंदिरा पॉइंट को नाम दिए जाने के बाद भारत सरकार ने इसे एक रणनीतिक पोस्ट के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया।
  • यह आज भी भारतीय तटरक्षक बल, नौसेना, और वैज्ञानिक अनुसंधान संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

इतिहास की झलकियाँ:

  • कई पुराने नक्शों और ब्रिटिश दस्तावेजों में Pygmalion Point के रूप में उल्लेख मिलता है।
  • 1980 के दशक की शुरुआत में यहाँ पहली बार स्थायी सर्वेक्षण और नौवहन संरचनाएं स्थापित की गईं।
  • 1985 के बाद से यह नाम पूरे भारत में शैक्षिक, प्रशासनिक और वैज्ञानिक दस्तावेजों में प्रयुक्त होने लगा।

संक्षिप्त रूप में ऐतिहासिक घटनाक्रम:

वर्षघटनाविवरण
ब्रिटिश कालपिग्मेलन पॉइंटब्रिटिश नौसेना द्वारा नामित और उपयोग
1984इंदिरा गांधी की मृत्युपूरे भारत में स्मारकों का नामकरण
30 अक्टूबर 1985नाम परिवर्तनपिग्मेलन पॉइंट को इंदिरा पॉइंट नाम दिया गया
1980sलाइटहाउस की स्थापनानौवहन के लिए महत्वपूर्ण संरचना

 2004 की विनाशकारी सुनामी और इंदिरा पॉइंट पर उसका प्रभाव–

सुनामी का असर:

  • 26 दिसंबर 2004 को आई भयानक सुनामी ने इंदिरा पॉइंट को लगभग मिटा दिया था।
  • समुद्र तल में करीब 4.5 मीटर की गिरावट दर्ज की गई और बिंदु का बड़ा हिस्सा समुद्र में समा गया।
  • वहाँ बना लाइटहाउस (प्रकाश स्तंभ) जो पहले समुद्र से ऊपर था, अब समुद्र की सतह के करीब आ गया है।
    वहाँ के निवासी, मुख्यतः शोम्पेन जनजाति और अन्य स्थानीय समुदाय, इस आपदा में बुरी तरह प्रभावित हुए।

वर्तमान स्थिति और सरकार की पहल-

 पुनर्निर्माण और पर्यटन योजना:

  • भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड ने क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ा दी है।
  • केंद्र सरकार ने इस बिंदु को रणनीतिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजनाएँ बनाई हैं।
  • अब यहाँ Eco-tourism Project, रोड नेटवर्क, एयरस्ट्रिप आदि की योजना है।

इंदिरा पॉइंट से जुड़े रोचक तथ्य और अनोखी बातें

कुछ खास बातें:

  • यह बिंदु इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप से मात्र 145 किलोमीटर दूर है।
  • यहाँ इंडियन सर्वे डिपार्टमेंट द्वारा एक विशेष शिला चिन्ह (सर्वे मार्कर) स्थापित किया गया है।
  • यहाँ मौजूद लाइटहाउस अब भी कार्यशील है और नौसैनिक मार्गदर्शन करता है।

प्रमुख सवाल–जवाब – FAQs

प्रश्न 1: भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु कौन सा है?
उत्तर: भारत का सबसे दक्षिणी भू-बिंदु “इंदिरा पॉइंट” है, जो ग्रेट निकोबार द्वीप में स्थित है।
प्रश्न 2: क्या इंदिरा पॉइंट भारत की मुख्यभूमि में आता है?
उत्तर: नहीं, यह भारत के द्वीप क्षेत्र – निकोबार द्वीपसमूह का हिस्सा है।
प्रश्न 3: क्या इंदिरा पॉइंट पर लोग रहते हैं?
उत्तर: सुनामी के बाद जनसंख्या कम हो गई है, लेकिन कुछ सरकारी कर्मचारी और वैज्ञानिक वहाँ तैनात रहते हैं।
प्रश्न 4: वहाँ कैसे पहुँचा जा सकता है?
उत्तर: पोर्ट ब्लेयर से हेलिकॉप्टर सेवा या समुद्री जहाज के माध्यम से पहुँचा जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

इंदिरा पॉइंट न सिर्फ भारत का सबसे दक्षिणी छोर है, बल्कि यह देश की भौगोलिक अखंडता का प्रतीक भी है। यह स्थान समुद्री पारिस्थितिकी, सामरिक दृष्टिकोण, और ऐतिहासिक घटनाओं के कारण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। 2004 की सुनामी के बाद यह क्षेत्र भले ही शांत हो गया हो, परंतु इसकी उपस्थिति भारत की समुद्री सीमा को एक दृढ़ पहचान देती है। आने वाले समय में इंदिरा पॉइंट को पर्यटन और जैवविविधता अध्ययन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

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